कांग्रेस की 200 सीटों की मांग से गठबंधन पर संकट, अखिलेश ने उठाए सवाल..!
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 150 सीटों की चर्चा को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी को गठबंधन में 200 सीटें मिलनी चाहिए। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच समझौते की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं।
कांग्रेस का तर्क है कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में उसे सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन को मजबूत करने और चुनावी विस्तार के लिए कांग्रेस को पर्याप्त सीटों पर चुनाव लड़ना जरूरी है।
वहीं, समाजवादी पार्टी इस मांग को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रही है। सपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को सीमित संख्या में सीटें देकर गठबंधन को व्यावहारिक बनाया जा सकता है। पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि 50 सीटों पर सहमति बन सकती है, तो उससे आगे की हर सीट की मांग क्यों की जा रही है।
अखिलेश ने जीत को बताया प्राथमिकता:-
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीटों की बहस के बीच कहा कि गठबंधन में कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा, यह मुख्य मुद्दा नहीं है। उन्होंने सहयोगी दलों से चुनावी जीत को प्राथमिकता देने की अपील की और कहा कि चर्चा का केंद्र गठबंधन की सफलता होनी चाहिए।
हालांकि, अखिलेश के इस संदेश के बावजूद सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस जहां बड़े हिस्से की मांग पर कायम है, वहीं सपा अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में सीटें छोड़ने को तैयार नहीं दिखती।
बयानबाजी से बढ़ी दूरी:-
कांग्रेस के 200 सीटों के दावे और सपा नेताओं की आपत्तियों ने गठबंधन के भविष्य को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि दोनों दलों के बीच जल्द कोई साझा फार्मूला नहीं बना, तो आगामी चुनाव में दोनों अलग-अलग रास्ते अपना सकते हैं।
फिलहाल गठबंधन टूटने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन नेताओं के बयानों से इतना स्पष्ट है कि सपा-कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में शीर्ष नेतृत्व की बातचीत ही तय करेगी कि गठबंधन बचता है या दोनों दल उत्तर प्रदेश में नए राजनीतिक सहयोगियों की तलाश शुरू करते हैं।
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